अन्वयः
ब्रह्मन् O Brahmana, समरुद्गण: I, together with hosts of maruts, ते to you, दीर्घम् long, आयुश्च life, ददामि am giving, स्वस्ति wellbeing, ते भद्रम् prosperity to you, प्राप्नुहि you may obtain, सौम्य O Gentle one, यथा सुखम् happily, गच्छ go.
Summary
O Brahmana I along with the maruts grant you long life. May you prosper O Gentle one now you may go happily".
पदच्छेदः
| दीर्घम् | दीर्घ (२.१) |
| आयुश् | आयुस् (२.१) |
| च | च (अव्ययः) |
| ते | त्वद् (४.१) |
| ब्रह्मन् | ब्रह्मन् (८.१) |
| ददामि | ददामि (√दा लट् उ.पु. ) |
| समरुद्गणः | स (अव्ययः)–मरुत्–गण (१.१) |
| स्वस्ति | स्वस्ति (२.१) |
| प्राप्नुहि | प्राप्नुहि (√प्र-आप् लोट् म.पु. ) |
| भद्रं | भद्र (१.१) |
| ते | त्वद् (४.१) |
| गच्छ | गच्छ (√गम् लोट् म.पु. ) |
| सौम्य | सौम्य (८.१) |
| यथासुखम् | यथासुखम् (अव्ययः) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| दी | र्घ | मा | यु | श्च | ते | ब्र | ह्म |
| न्द | दा | मि | स | म | रु | द्ग | णः |
| स्व | स्ति | प्रा | प्नु | हि | भ | द्रं | ते |
| ग | च्छ | सौ | म्य | य | था | सु | खम् |