अन्वयः
तत: there upon, देवै: by devatas, प्रसादित: propitiated, जपतां वर: the best among ascetics, वसिष्ठ: Vasishta, सख्यम् friendship, चकार made, एवम् thus, ब्रह्मर्षि: अस्तु become brahmarshi, इति in this manner saying so, अब्रवीत् च spoken.
Summary
Thereupon, pleased by the gods, Vasishta, the best among ascetics, lovingly said to Viswamitra "You are a Brahmarshi, let it be so".
पदच्छेदः
| ततः | ततस् (अव्ययः) |
| प्रसादितो | प्रसादित (√प्र-सादय् + क्त, १.१) |
| देवैर् | देव (३.३) |
| वसिष्ठो | वसिष्ठ (१.१) |
| जपतां | जपत् (√जप् + शतृ, ६.३) |
| वरः | वर (१.१) |
| सख्यं | सख्य (२.१) |
| चकार | चकार (√कृ लिट् प्र.पु. एक.) |
| ब्रह्मर्षिर् | ब्रह्मर्षि (१.१) |
| एवम् | एवम् (अव्ययः) |
| अस्त्व् | अस्तु (√अस् लोट् प्र.पु. एक.) |
| इति | इति (अव्ययः) |
| चाब्रवीत् | च (अव्ययः)–अब्रवीत् (√ब्रू लङ् प्र.पु. एक.) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| त | तः | प्र | सा | दि | तो | दे | वै |
| र्व | सि | ष्ठो | ज | प | तां | व | रः |
| स | ख्यं | च | का | र | ब्र | ह्म | र्षि |
| रे | व | म | स्त्वि | ति | चा | ब्र | वीत् |