ब्रह्मर्षित्वं न संदेहः सर्वं संपत्स्यते तव ।
इत्युक्त्वा देवताश्चापि सर्वा जग्मुर्यथागतम् ॥
ब्रह्मर्षित्वं न संदेहः सर्वं संपत्स्यते तव ।
इत्युक्त्वा देवताश्चापि सर्वा जग्मुर्यथागतम् ॥
अन्वयः
त्वम् you, ब्रह्मर्षि: are a Brahmarshi, सन्देह: न no doubt, तव to you,सर्वम् all, सम्पत्स्यते will be achieved (ascetic perfection), इति so, उक्त्वा having said, सर्वा: all, देवता: devatas, यथागतम् where they had come from, जग्मु: went away.Summary
"You are a Brahmarshi, no doubt. You will achieve ascetic perfection", said the gods and returned to their respective places from where they had come.पदच्छेदः
| ब्रह्मर्षित्वं | ब्रह्मर्षि–त्व (१.१) |
| न | न (अव्ययः) |
| संदेहः | संदेह (१.१) |
| सर्वं | सर्व (१.१) |
| सम्पत्स्यते | सम्पत्स्यते (√सम्-पद् लृट् प्र.पु. एक.) |
| तव | त्वद् (६.१) |
| इत्य् | इति (अव्ययः) |
| उक्त्वा | उक्त्वा (√वच् + क्त्वा) |
| देवताश् | देवता (१.३) |
| चापि | च (अव्ययः)–अपि (अव्ययः) |
| सर्वा | सर्व (१.३) |
| जग्मुर् | जग्मुः (√गम् लिट् प्र.पु. बहु.) |
| यथागतम् | यथागत (२.१) |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| ब्र | ह्म | र्षि | त्वं | न | सं | दे | हः |
| स | र्वं | सं | प | त्स्य | ते | त | व |
| इ | त्यु | क्त्वा | दे | व | ता | श्चा | पि |
| स | र्वा | ज | ग्मु | र्य | था | ग | तम् |