विश्वामित्रोऽपि धर्मात्मा लब्ध्वा ब्राह्मण्यमुत्तमम् ।
पूजयामास ब्रह्मर्षिं वसिष्ठं जपतां वरम् ॥
विश्वामित्रोऽपि धर्मात्मा लब्ध्वा ब्राह्मण्यमुत्तमम् ।
पूजयामास ब्रह्मर्षिं वसिष्ठं जपतां वरम् ॥
अन्वयः
धर्मात्मा virtuous, विश्वामित्र: अपि Visvamitra also, उत्तमम् excellent, ब्रह्मण्यम् brahminhood, लब्ध्वा having attained, ब्रह्मर्षिम् brahmrshi, जपताम् वरम् the best of those who recite prayers, वसिष्ठम् Vasishta, पूजयामास worshipped.Summary
Virtuous Viswamitra also, having attained excellent brahminhood, worshipped Brahmrshi Vasishta who was the best of those who recite hymns".पदच्छेदः
| विश्वामित्रो | विश्वामित्र (१.१) |
| ऽपि | अपि (अव्ययः) |
| धर्मात्मा | धर्म–आत्मन् (१.१) |
| लब्ध्वा | लब्ध्वा (√लभ् + क्त्वा) |
| ब्राह्मण्यम् | ब्राह्मण्य (२.१) |
| उत्तमम् | उत्तम (२.१) |
| पूजयामास | पूजयामास (√पूजय् प्र.पु. एक.) |
| ब्रह्मर्षिं | ब्रह्मर्षि (२.१) |
| वसिष्ठं | वसिष्ठ (२.१) |
| जपतां | जपत् (√जप् + शतृ, ६.३) |
| वरम् | वर (२.१) |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| वि | श्वा | मि | त्रो | ऽपि | ध | र्मा | त्मा |
| ल | ब्ध्वा | ब्रा | ह्म | ण्य | मु | त्त | मम् |
| पू | ज | या | मा | स | ब्र | ह्म | र्षिं |
| व | सि | ष्ठं | ज | प | तां | व | रम् |