अन्वयः
विभो: O Lord, आश्चर्यभूतानाम् forming wonders, कथानाम् pertaining to the deeds, मे to me, तृप्ति: satisfaction, नास्ति is not there, मुनिश्रेष्ठ O Excellent of ascetics, रविमण्डलम् the halo around the Sun, लम्बते is hanging down, कर्मकाल: (It is time for) evening ablutions.
Summary
O Lord I am never tired of listening to your marvellous deeds. O Excellent among ascetics the Sun has set and it is time for evening prayers.
पदच्छेदः
| तृप्तिर् | तृप्ति (१.१) |
| आश्चर्यभूतानां | आश्चर्य–भूत (√भू + क्त, ६.३) |
| कथानां | कथा (६.३) |
| नास्ति | न (अव्ययः)–अस्ति (√अस् लट् प्र.पु. एक.) |
| मे | मद् (६.१) |
| विभो | विभु (८.१) |
| कर्मकालो | कर्मन्–काल (१.१) |
| मुनिश्रेष्ठ | मुनि–श्रेष्ठ (८.१) |
| लम्बते | लम्बते (√लम्ब् लट् प्र.पु. एक.) |
| रविमण्डलम् | रवि–मण्डल (१.१) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| तृ | प्ति | रा | श्च | र्य | भू | ता | नां |
| क | था | नां | ना | स्ति | मे | वि | भो |
| क | र्म | का | लो | मु | नि | श्रे | ष्ठ |
| ल | म्ब | ते | र | वि | म | ण्ड | लम् |