अन्वयः
देव O Divine lord, महामुनि: great ascetic, विश्वामित्र: Visvamitra, बहुभि: with various, कारणै: by reasons, लोभित: having been lured, क्रोधितश्चैव having been angered, तपसा with his austerities, अभिवर्धते is growing:
Summary
"O Lord the great sage Viswamitra was lured and angered in various ways. But his austerities continued to grow:
पदच्छेदः
| बहुभिः | बहु (३.३) |
| कारणैर् | कारण (३.३) |
| देव | देव (८.१) |
| विश्वामित्रो | विश्वामित्र (१.१) |
| महामुनिः | महत्–मुनि (१.१) |
| लोभितः | लोभित (√लोभय् + क्त, १.१) |
| क्रोधितश् | क्रोधित (√क्रोधय् + क्त, १.१) |
| चैव | च (अव्ययः)–एव (अव्ययः) |
| तपसा | तपस् (३.१) |
| चाभिवर्धते | च (अव्ययः)–अभिवर्धते (√अभि-वृध् लट् प्र.पु. एक.) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| ब | हु | भिः | का | र | णै | र्दे | व |
| वि | श्वा | मि | त्रो | म | हा | मु | निः |
| लो | भि | तः | क्रो | धि | त | श्चै | व |
| त | प | सा | चा | भि | व | र्ध | ते |