अन्वयः
देव O Lord, महामुनि: the mighty ascetic, नाशे in destruction, यावत् until, बुद्धिम् mind, न कुरुते does not make, तावत् till then, अग्निरूप: resembling fire, महाद्युति: highly effulgent, भगवान् venerable, Visvamitra, प्रसाद्य: should be appeased.
Summary
O Lord before this mighty, venerable ascetic, effulgent like fire decides to destroy the three worlds, he should be appeased.
पदच्छेदः
| बुद्धिं | बुद्धि (२.१) |
| न | न (अव्ययः) |
| कुरुते | कुरुते (√कृ लट् प्र.पु. एक.) |
| यावन् | यावत् (अव्ययः) |
| नाशे | नाश (७.१) |
| देव | देव (८.१) |
| महामुनिः | महत्–मुनि (१.१) |
| तावत् | तावत् (अव्ययः) |
| प्रसाद्यो | प्रसाद्य (√प्र-सादय् + कृत्, १.१) |
| भगवान् | भगवत् (१.१) |
| अग्निरूपो | अग्नि–रूप (१.१) |
| महाद्युतिः | महत्–द्युति (१.१) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| बु | द्धिं | न | कु | रु | ते | या | व |
| न्ना | शे | दे | व | म | हा | मु | निः |
| ता | व | त्प्र | सा | द्यो | भ | ग | वा |
| न | ग्नि | रू | पो | म | हा | द्यु | तिः |