पदच्छेदः
| सागराः | सागर (१.३) |
| क्षुभिताः | क्षुभित (√क्षुभ् + क्त, १.३) |
| सर्वे | सर्व (१.३) |
| विशीर्यन्ते | विशीर्यन्ते (√वि-शृ प्र.पु. बहु.) |
| च | च (अव्ययः) |
| पर्वताः | पर्वत (१.३) |
| प्रकम्पते | प्रकम्पते (√प्र-कम्प् लट् प्र.पु. एक.) |
| च | च (अव्ययः) |
| पृथिवी | पृथिवी (१.१) |
| वायुर् | वायु (१.१) |
| वाति | वाति (√वा लट् प्र.पु. एक.) |
| भृशाकुलः | भृश–आकुल (१.१) |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| सा | ग | राः | क्षु | भि | ताः | स | र्वे |
| वि | शी | र्य | न्ते | च | प | र्व | ताः |
| प्र | क | म्प | ते | च | पृ | थि | वी |
| वा | यु | र्वा | ति | भृ | शा | कु | लः |