अन्वयः
मुनिपुङ्गव O Eminent ascetic, तत: thereater, सर्वे all, देवा: devatas, विमनस: with dejected minds, देवेशम् lord of devatas, Siva, प्रसादयन्ति propitiated, भव: Siva, तेषाम् in their matter, प्रीत: अभवत् was pleased.
Summary
"O Eminent ascetic thereafter all the gods with agitated minds propitiated lord of the gods, Siva and he was pleased with them.
पदच्छेदः
| ततो | ततस् (अव्ययः) |
| विमनसः | विमनस् (१.३) |
| सर्वे | सर्व (१.३) |
| देवा | देव (१.३) |
| वै | वै (अव्ययः) |
| मुनिपुंगव | मुनि–पुंगव (८.१) |
| प्रसादयन्ति | प्रसादयन्ति (√प्र-सादय् लट् प्र.पु. बहु.) |
| देवेशं | देवेश (२.१) |
| तेषां | तद् (६.३) |
| प्रीतो | प्रीत (√प्री + क्त, १.१) |
| ऽभवद् | अभवत् (√भू लङ् प्र.पु. एक.) |
| भवः | भव (१.१) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| त | तो | वि | म | न | सः | स | र्वे |
| दे | वा | वै | मु | नि | पुं | ग | व |
| प्र | सा | द | य | न्ति | दे | वे | शं |
| ते | षां | प्री | तो | ऽभ | व | द्भ | वः |