अन्वयः
मुनिपुङ्गव O Eminent ascetic, भूतलात् from the earth, उत्थिताम् arisen, वर्धमानां growing, ताम् that, आत्मजाम् my daughter, राजान: kings, आगम्य having arrived, वरयामासु: had sought.
Summary
O Eminent ascetic arisen from the earth and reared as my daughter, she has been sought after in marriage by many princes.
पदच्छेदः
| भूतलाद् | भू–तल (५.१) |
| उत्थितां | उत्थित (√उत्-स्था + क्त, २.१) |
| तां | तद् (२.१) |
| तु | तु (अव्ययः) |
| वर्धमानां | वर्धमान (√वृध् + शानच्, २.१) |
| ममात्मजाम् | मद् (६.१)–आत्मजा (२.१) |
| वरयामासुर् | वरयामासुः (√वरय् प्र.पु. बहु.) |
| आगम्य | आगम्य (√आ-गम् + ल्यप्) |
| राजानो | राजन् (१.३) |
| मुनिपुंगव | मुनि–पुंगव (८.१) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| भू | त | ला | दु | त्थि | तां | तां | तु |
| व | र्ध | मा | नां | म | मा | त्म | जाम् |
| व | र | या | मा | सु | रा | ग | म्य |
| रा | जा | नो | मु | नि | पुं | ग | व |