अन्वयः
ते those, नृपपुङ्गवा: eminent kings, आत्मानम् them, अवधूतम् have been insulted, विज्ञाय knowing, महता with great, रोषेण (कोपेन) with anger, आविष्टा: filled, मिथिलां पुरीम् city of Mithila, पीडयन् while tormenting.
Summary
Those eminent kings felt humiliated. Inflamed with anger, they tormented the city of Mithila.
पदच्छेदः
| आत्मानम् | आत्मन् (२.१) |
| अवधूतं | अवधूत (√अव-धू + क्त, २.१) |
| ते | तद् (१.३) |
| विज्ञाय | विज्ञाय (√वि-ज्ञा + ल्यप्) |
| मुनिपुंगव | मुनि–पुंगव (८.१) |
| रोषेण | रोष (३.१) |
| महताविष्टाः | महत् (३.१)–आविष्ट (√आ-विश् + क्त, १.३) |
| पीडयन् | पीडयन् (√पीडय् लङ् प्र.पु. बहु.) |
| मिथिलां | मिथिला (२.१) |
| पुरीम् | पुरी (२.१) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| आ | त्मा | न | म | व | धू | तं | ते |
| वि | ज्ञा | य | मु | नि | पुं | ग | व |
| रो | षे | ण | म | ह | ता | वि | ष्टाः |
| पी | ड | य | न्मि | थि | लां | पु | रीम् |