अन्वयः
तत: thereafter, अहम् I, तपसा by austerities, सर्वान् all, देवगणान् multitude of devatas, प्रसादयम् propitiated them, सुरा: devatas, परमप्रीता: were highly pleased, चतुरङ्गबलम् (divine) army of four divisions, ददु: gave.
Summary
Thereafter, I propitiated the gods by my austerities. Highly pleased, they gave me an army of four divisions (chariots, elephants, horses and infantry ).
पदच्छेदः
| ततो | ततस् (अव्ययः) |
| देवगणान् | देव–गण (२.३) |
| सर्वांस् | सर्व (२.३) |
| तपसाहं | तपस् (३.१)–मद् (१.१) |
| प्रसादयम् | प्रसादयम् (√प्र-सादय् लङ् उ.पु. ) |
| ददुश् | ददुः (√दा लिट् प्र.पु. बहु.) |
| च | च (अव्ययः) |
| परमप्रीताश् | परम–प्रीत (√प्री + क्त, १.३) |
| चतुरङ्गबलं | चतुर्–अङ्ग–बल (२.१) |
| सुराः | सुर (१.३) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| त | तो | दे | व | ग | णा | न्स | र्वां |
| स्त | प | सा | हं | प्र | सा | द | यम् |
| द | दु | श्च | प | र | म | प्री | ता |
| श्च | तु | र | ङ्ग | ब | लं | सु | राः |