अन्वयः
मुनिपुङ्गव O Eminent ascetic, तत् such, एतत् this, धनुषाम् among bows, श्रेष्ठम् excellent one, आनीतम् is brought, महाभाग O Highly fortunate one, एतत् this, अनयो: राजपुत्रयो: for these two princes, दर्शय show it.
Summary
O Eminent ascetic such heaviest bow is brought here, O Highly accomplished sage show this to the two princes".
पदच्छेदः
| तद् | तद् (२.१) |
| एतद् | एतद् (२.१) |
| धनुषां | धनुस् (६.३) |
| श्रेष्ठम् | श्रेष्ठ (२.१) |
| आनीतं | आनीत (√आ-नी + क्त, २.१) |
| मुनिपुंगव | मुनि–पुंगव (८.१) |
| दर्शयैतन् | दर्शय (√दर्शय् लोट् म.पु. )–एतद् (२.१) |
| महाभाग | महाभाग (८.१) |
| अनयो | इदम् (६.२) |
| राजपुत्रयोः | राजन्–पुत्र (६.२) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| त | दे | त | द्ध | नु | षां | श्रे | ष्ठ |
| मा | नी | तं | मु | नि | पुं | ग | व |
| द | र्श | यै | त | न्म | हा | भा | ग |
| अ | न | यो | रा | ज | पु | त्र | योः |