अन्वयः
राम: Rama, ब्रह्मर्षे: Brahmarshi's, वचनात् by the words, तत् धनु: that bow, यत्र wherever, तिष्ठति is placed, ताम् that, मञ्जूषाम् box, अपावृत्य having opened, धनु: bow, दृष्ट्वा having seen, अथ thereater, अब्रवीत् spoke.
Summary
At the words of the great rishi Viswamitra, Rama opened the casket, beheld the bow and said:
पदच्छेदः
| महर्षेर् | महत्–ऋषि (६.१) |
| वचनाद् | वचन (५.१) |
| रामो | राम (१.१) |
| यत्र | यत्र (अव्ययः) |
| तिष्ठति | तिष्ठति (√स्था लट् प्र.पु. एक.) |
| तद् | तद् (१.१) |
| धनुः | धनुस् (१.१) |
| मञ्जूषां | मञ्जूषा (२.१) |
| ताम् | तद् (२.१) |
| अपावृत्य | अपावृत्य (√अपा-वृ + ल्यप्) |
| दृष्ट्वा | दृष्ट्वा (√दृश् + क्त्वा) |
| धनुर् | धनुस् (२.१) |
| अथाब्रवीत् | अथ (अव्ययः)–अब्रवीत् (√ब्रू लङ् प्र.पु. एक.) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| म | ह | र्षे | र्व | च | ना | द्रा | मो |
| य | त्र | ति | ष्ठ | ति | त | द्ध | नुः |
| म | ञ्जू | षां | ता | म | पा | वृ | त्य |
| दृ | ष्ट्वा | ध | नु | र | था | ब्र | वीत् |