अन्वयः
नृप: king, तेषाम् their, वच: words, श्रुत्वा having listened, कृताञ्जलि: with folded palms, महात्मानम् magnanimous, विश्वामित्रम् Viswamitra, तौ उभौ those two, रामलक्ष्मणौ Rama and Lakshmana, अभाषत said.
Summary
Having heard this, the king with folded hands said to the great soul Viswamitra sitting with the two princes Rama and Lakshmana:
पदच्छेदः
| तेषां | तद् (६.३) |
| नृपो | नृप (१.१) |
| वचः | वचस् (२.१) |
| श्रुत्वा | श्रुत्वा (√श्रु + क्त्वा) |
| कृताञ्जलिर् | कृताञ्जलि (१.१) |
| अभाषत | अभाषत (√भाष् लङ् प्र.पु. एक.) |
| विश्वामित्रं | विश्वामित्र (२.१) |
| महात्मानं | महात्मन् (२.१) |
| तौ | तद् (२.२) |
| चोभौ | च (अव्ययः)–उभ् (२.२) |
| रामलक्ष्मणौ | राम–लक्ष्मण (२.२) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| ते | षां | नृ | पो | व | चः | श्रु | त्वा |
| कृ | ता | ञ्ज | लि | र | भा | ष | त |
| वि | श्वा | मि | त्रं | म | हा | त्मा | नं |
| तौ | चो | भौ | रा | म | ल | क्ष्म | णौ |