अन्वयः
राजेन्द्र O Indra among kings, मम for me, प्रीतिम् pleasure, निर्वर्तयितुम् to cause, अर्हसि it behoves of you, त्वमपि you also, उभयो: both of your, पुत्रयो: sons, प्रीतिम् delight, लप्स्यसे will obtain.
Summary
O Indra among kings you will not only bring me pleasure, you will also be happy to see your sons.
पदच्छेदः
| प्रीतिं | प्रीति (२.१) |
| च | च (अव्ययः) |
| मम | मद् (६.१) |
| राजेन्द्र | राजन्–इन्द्र (८.१) |
| निर्वर्तयितुम् | निर्वर्तयितुम् (√निः-वर्तय् + तुमुन्) |
| अर्हसि | अर्हसि (√अर्ह् लट् म.पु. ) |
| पुत्रयोर् | पुत्र (६.२) |
| उभयोर् | उभय (६.२) |
| एव | एव (अव्ययः) |
| प्रीतिं | प्रीति (२.१) |
| त्वम् | त्वद् (१.१) |
| अपि | अपि (अव्ययः) |
| लप्स्यसे | लप्स्यसे (√लभ् लृट् म.पु. ) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| प्री | तिं | च | म | म | रा | जे | न्द्र |
| नि | र्व | र्त | यि | तु | म | र्ह | सि |
| पु | त्र | यो | रु | भ | यो | रे | व |
| प्री | तिं | त्व | म | पि | ल | प्स्य | से |