अन्वयः
काकुत्स्थ: Rama, महात्मना by the illustrious, जनकेन by Janaka, दृष्टवीर्य: having proved the prowess (that Janaka), सुताया: daughter's, सम्प्रदानम् bestowal, राघवे to Rama, कर्तुम् to do, इच्छति is desiring.
Summary
Illustrious Janaka desires to bestow his daughter on the descendat of Kakustha (Rama) whose prowess he has witnessed.
पदच्छेदः
| दृष्टवीर्यस् | दृष्ट (√दृश् + क्त)–वीर्य (१.१) |
| तु | तु (अव्ययः) |
| काकुत्स्थो | काकुत्स्थ (१.१) |
| जनकेन | जनक (३.१) |
| महात्मना | महात्मन् (३.१) |
| सम्प्रदानं | सम्प्रदान (२.१) |
| सुतायास् | सुता (६.१) |
| तु | तु (अव्ययः) |
| राघवे | राघव (७.१) |
| कर्तुम् | कर्तुम् (√कृ + तुमुन्) |
| इच्छति | इच्छति (√इष् लट् प्र.पु. एक.) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| दृ | ष्ट | वी | र्य | स्तु | का | कु | त्स्थो |
| ज | न | के | न | म | हा | त्म | ना |
| सं | प्र | दा | नं | सु | ता | या | स्तु |
| रा | घ | वे | क | र्तु | मि | च्छ | ति |