मन्त्रिणस्तु नरेन्द्रस्य रात्रिं परमसत्कृताः ।
ऊषुः प्रमुदिताः सर्वे गुणैः सर्वैः समन्विताः ॥
मन्त्रिणस्तु नरेन्द्रस्य रात्रिं परमसत्कृताः ।
ऊषुः प्रमुदिताः सर्वे गुणैः सर्वैः समन्विताः ॥
पदच्छेदः
| मन्त्रिणस् | मन्त्रिन् (१.३) |
| तु | तु (अव्ययः) |
| नरेन्द्रस्य | नरेन्द्र (६.१) |
| रात्रिं | रात्रि (२.१) |
| परमसत्कृताः | परम–सत्कृत (√सत्-कृ + क्त, १.३) |
| ऊषुः | ऊषुः (√वस् लिट् प्र.पु. बहु.) |
| प्रमुदिताः | प्रमुदित (√प्र-मुद् + क्त, १.३) |
| सर्वे | सर्व (१.३) |
| गुणैः | गुण (३.३) |
| सर्वैः | सर्व (३.३) |
| समन्विताः | समन्वित (१.३) |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| म | न्त्रि | ण | स्तु | न | रे | न्द्र | स्य |
| रा | त्रिं | प | र | म | स | त्कृ | ताः |
| ऊ | षुः | प्र | मु | दि | ताः | स | र्वे |
| गु | णैः | स | र्वैः | स | म | न्वि | ताः |