अन्वयः
तदा then, मारीच: Maricha's son, महातेजा: exceedingly lustrous, काश्यप: Kashyapa, तस्या: her, तत् वचनम् those words, श्रुत्वा having heard, परमदुखि:ताम् deeply grieved, दितिम् addressing Diti, प्रत्युवाच replied.
Summary
Then, Maricha's son, exceedingly bright Kasyapa on hearing the words of Diti who was deeply grieved replied:
पदच्छेदः
| तस्य | तद् (६.१) |
| तद्वचनं | तद् (२.१)–वचन (२.१) |
| श्रुत्वा | श्रुत्वा (√श्रु + क्त्वा) |
| ऋषिमध्ये | ऋषि–मध्य (७.१) |
| नराधिपः | नर–अधिप (१.१) |
| वाक्यं | वाक्य (२.१) |
| वाक्यविदां | वाक्य–विद् (६.३) |
| श्रेष्ठः | श्रेष्ठ (१.१) |
| प्रत्युवाच | प्रत्युवाच (√प्रति-वच् लिट् प्र.पु. एक.) |
| महीपतिम् | महीपति (२.१) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| त | स्य | त | द्व | च | नं | श्रु | त्वा |
| ऋ | षि | म | ध्ये | न | रा | धि | पः |
| वा | क्यं | वा | क्य | वि | दां | श्रे | ष्ठः |
| प्र | त्यु | वा | च | म | ही | प | तिम् |