पदच्छेदः
| अवेक्षमाणश् | अवेक्षमाण (√अव-ईक्ष् + शानच्, १.१) |
| चारेण | चार (३.१) |
| प्रजा | प्रजा (२.३) |
| धर्मेण | धर्म (३.१) |
| रञ्जयन् | रञ्जयत् (√रञ्जय् + शतृ, १.१) |
| नाध्यगच्छद् | न (अव्ययः)–अध्यगच्छत् (√अधि-गम् लङ् प्र.पु. एक.) |
| विशिष्टं | विशिष्ट (√वि-शिष् + क्त, २.१) |
| वा | वा (अव्ययः) |
| तुल्यं | तुल्य (२.१) |
| वा | वा (अव्ययः) |
| शत्रुम् | शत्रु (२.१) |
| आत्मनः | आत्मन् (६.१) |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| अ | वे | क्ष | मा | ण | श्चा | रे | ण |
| प्र | जा | ध | र्मे | ण | र | ञ्ज | यन् |
| ना | ध्य | ग | च्छ | द्वि | शि | ष्टं | वा |
| तु | ल्यं | वा | श | त्रु | मा | त्म | नः |