स्वस्ति प्राप्नुहि भद्रं ते गमिष्यामि स्वमालयम् ।
श्राद्धकर्माणि सर्वाणि विधास्य इति चाब्रवीत् ॥
स्वस्ति प्राप्नुहि भद्रं ते गमिष्यामि स्वमालयम् ।
श्राद्धकर्माणि सर्वाणि विधास्य इति चाब्रवीत् ॥
अन्वयः
स्वस्ति safety, प्राप्नुहि you may obtain, ते भद्रम् prosperity to you, स्वम् relating to mine, आलयम् residence, गमिष्यामि I shall go, सर्वाणि all, श्राद्धकर्माणि rites concerning the ceremony in accordance with the rituals, विधास्यामि च I shall perform, इति thus, अब्रवीत् spoke.Summary
"Be safe. Be blessed. Let me retire to the camp. I have to perform the rites offerings to the forefathers".पदच्छेदः
| स्वस्ति | स्वस्ति (२.१) |
| प्राप्नुहि | प्राप्नुहि (√प्र-आप् लोट् म.पु. ) |
| भद्रं | भद्र (१.१) |
| ते | त्वद् (४.१) |
| गमिष्यामि | गमिष्यामि (√गम् लृट् उ.पु. ) |
| स्वम् | स्व (२.१) |
| आलयम् | आलय (२.१) |
| श्राद्धकर्माणि | श्राद्ध–कर्मन् (२.३) |
| सर्वाणि | सर्व (२.३) |
| विधास्य | विधास्ये (√वि-धा लृट् उ.पु. ) |
| इति | इति (अव्ययः) |
| चाब्रवीत् | च (अव्ययः)–अब्रवीत् (√ब्रू लङ् प्र.पु. एक.) |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| स्व | स्ति | प्रा | प्नु | हि | भ | द्रं | ते |
| ग | मि | ष्या | मि | स्व | मा | ल | यम् |
| श्रा | द्ध | क | र्मा | णि | स | र्वा | णि |
| वि | धा | स्य | इ | ति | चा | ब्र | वीत् |