अन्वयः
तदा then, वसिष्ठस्य Vasistha's, मते by wish, विश्वामित्रवच: Viswamitra's words, शृत्वा having listened, जनक: Janaka, प्रांजलि: with folded palms, मुनिपुङ्गवौ addressing eminent asetics, वाक्यम् words, उवाच spoke.
Summary
Having heard the words of Viswamitra which echoed the wish of Vasishta, Janaka replied to the eminent ascetics with folded palms.
पदच्छेदः
| विश्वामित्रवचः | विश्वामित्र–वचस् (२.१) |
| श्रुत्वा | श्रुत्वा (√श्रु + क्त्वा) |
| वसिष्ठस्य | वसिष्ठ (६.१) |
| मते | मत (७.१) |
| तदा | तदा (अव्ययः) |
| जनकः | जनक (१.१) |
| प्राञ्जलिर् | प्राञ्जलि (१.१) |
| वाक्यम् | वाक्य (२.१) |
| उवाच | उवाच (√वच् लिट् प्र.पु. एक.) |
| मुनिपुंगवौ | मुनि–पुंगव (२.२) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| वि | श्वा | मि | त्र | व | चः | श्रु | त्वा |
| व | सि | ष्ठ | स्य | म | ते | त | दा |
| ज | न | कः | प्रा | ञ्ज | लि | र्वा | क्य |
| मु | वा | च | मु | नि | पुं | ग | वौ |