अब्रवीज्जनको राजा कौसल्यानन्दवर्धनम् ।
इयं सीता मम सुता सहधर्मचरी तव ।
प्रतीच्छ चैनां भद्रं ते पाणिं गृह्णीष्व पाणिना ॥
अब्रवीज्जनको राजा कौसल्यानन्दवर्धनम् ।
इयं सीता मम सुता सहधर्मचरी तव ।
प्रतीच्छ चैनां भद्रं ते पाणिं गृह्णीष्व पाणिना ॥
अन्वयः
मम my, सुता daughter, तव your, सहधर्मचरी with you observing righteous deeds, सीता Sita, इयम् this girl, एनाम् her, प्रतीच्छ च accept, ते भद्रम् prosperity to you, पाणिम् her hand, पाणिना with your hand, गृह्णीष्व hold.Summary
"This my daughter Sita will be your partner in performing her rightful duty. Accept her. Farewell. Take her hand into your own.पदच्छेदः
| अब्रवीज् | अब्रवीत् (√ब्रू लङ् प्र.पु. एक.) |
| जनको | जनक (१.१) |
| राजा | राजन् (१.१) |
| कौसल्यानन्दवर्धनम् | कौसल्या–आनन्द–वर्धन (२.१) |
| इयं | इदम् (१.१) |
| सीता | सीता (१.१) |
| मम | मद् (६.१) |
| सुता | सुता (१.१) |
| सहधर्मचरी | सहधर्मचर (१.१) |
| तव | त्वद् (६.१) |
| प्रतीच्छ | प्रतीच्छ (√प्रति-इष् लोट् म.पु. ) |
| चैनां | च (अव्ययः)–एनद् (२.१) |
| भद्रं | भद्र (१.१) |
| ते | त्वद् (४.१) |
| पाणिं | पाणि (२.१) |
| गृह्णीष्व | गृह्णीष्व (√ग्रह् लोट् म.पु. ) |
| पाणिना | पाणि (३.१) |
छन्दः
उपजातिः [११]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| अ | ब्र | वी | ज्ज | न | को | रा | जा | कौ | स | ल्या | न |
| न्द | व | र्ध | नम् | इ | यं | सी | ता | म | म | सु | ता |
| स | ह | ध | र्म | च | री | त | व | प्र | ती | च्छ | चै |
| नां | भ | द्रं | ते | पा | णिं | गृ | ह्णी | ष्व | पा | णि | ना |