अन्वयः
धर्मात्मा Virtuous, जनकेश्वर: monarch Janaka, शत्रुघ्नं चापि addressing Satrghna also, अब्रवीत् spoke, महाबाहो O Mighty armed one, पाणिना with your hand, श्रुतकीर्त्या: Srutakirti's, पाणिम् hand, गृह्णीष्व hold.
Summary
The righteous king Janaka, said again: "O Mightyarmed Satrughna take the hands of Srutakirti".
पदच्छेदः
| शत्रुघ्नं | शत्रुघ्न (२.१) |
| चापि | च (अव्ययः)–अपि (अव्ययः) |
| धर्मात्मा | धर्म–आत्मन् (१.१) |
| अब्रवीज् | अब्रवीत् (√ब्रू लङ् प्र.पु. एक.) |
| जनकेश्वरः | जनक–ईश्वर (१.१) |
| श्रुतकीर्त्या | श्रुत (√श्रु + क्त)–कीर्ति (३.१) |
| महाबाहो | महत्–बाहु (८.१) |
| पाणिं | पाणि (२.१) |
| गृह्णीष्व | गृह्णीष्व (√ग्रह् लोट् म.पु. ) |
| पाणिना | पाणि (३.१) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| श | त्रु | घ्नं | चा | पि | ध | र्मा | त्मा |
| अ | ब्र | वी | ज्ज | न | के | श्व | रः |
| श्रु | त | की | र्त्या | म | हा | बा | हो |
| पा | णिं | गृ | ह्णी | ष्व | पा | णि | ना |