अग्निं प्रदक्षिणं कृत्वा वेदिं राजानमेव च ।
ऋषींश्चैव महात्मानः सह भार्या रघूत्तमाः ।
यथोक्तेन तथा चक्रुर्विवाहं विधिपूर्वकम् ॥
अग्निं प्रदक्षिणं कृत्वा वेदिं राजानमेव च ।
ऋषींश्चैव महात्मानः सह भार्या रघूत्तमाः ।
यथोक्तेन तथा चक्रुर्विवाहं विधिपूर्वकम् ॥
अन्वयः
महात्मान: magnanimous, रघुसत्तमा: greatest in the race of Raghu, सभार्या accompanied by their wives, अग्निं sacred fire, वेदिम् altar, राजानमेव च king Janaka, ऋषींश्चैव sages also, प्रदक्षिणीकृत्य having circumabulted, यथोक्तेन in obedience to the directions, विधिपूर्वकम् in accordance with the scriptures, विवाहम् marriage, चक्रु: made.Summary
The great, noble princes of the race of Raghu, accompanied by their wives circumambulated the altar of the sacred fire. King Janaka and the sages in obedience to the directions of Vasishta and in accordance with the sastras conducted the matrimonial.पदच्छेदः
| अग्निं | अग्नि (२.१) |
| प्रदक्षिणं | प्रदक्षिण (२.१) |
| कृत्वा | कृत्वा (√कृ + क्त्वा) |
| वेदिं | वेदि (२.१) |
| राजानम् | राजन् (२.१) |
| एव | एव (अव्ययः) |
| च | च (अव्ययः) |
| ऋषींश् | ऋषि (२.३) |
| चैव | च (अव्ययः)–एव (अव्ययः) |
| महात्मानः | महात्मन् (१.३) |
| सहभार्या | सह (अव्ययः)–भार्या (१.३) |
| रघूत्तमाः | रघु–उत्तम (१.३) |
| यथोक्तेन | यथा (अव्ययः)–उक्त (√वच् + क्त, ३.१) |
| तथा | तथा (अव्ययः) |
| चक्रुर् | चक्रुः (√कृ लिट् प्र.पु. बहु.) |
| विवाहं | विवाह (२.१) |
| विधिपूर्वकम् | विधि–पूर्वक (२.१) |
छन्दः
उपजातिः [११]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| अ | ग्निं | प्र | द | क्षि | णं | कृ | त्वा | वे | दिं | रा | जा |
| न | मे | व | च | ऋ | षीं | श्चै | व | म | हा | त्मा | नः |
| स | ह | भा | र्या | र | घू | त्त | माः | य | थो | क्ते | न |
| त | था | च | क्रु | र्वि | वा | हं | वि | धि | पू | र्व | कम् |