पदच्छेदः
| ननृतुश् | ननृतुः (√नृत् लिट् प्र.पु. बहु.) |
| चाप्सरःसंघा | च (अव्ययः)–अप्सरस्–संघ (१.३) |
| गन्धर्वाश् | गन्धर्व (१.३) |
| च | च (अव्ययः) |
| जगुः | जगुः (√गा लिट् प्र.पु. बहु.) |
| कलम् | कल (२.१) |
| विवाहे | विवाह (७.१) |
| रघुमुख्यानां | रघु–मुख्य (६.३) |
| तद् | तद् (१.१) |
| अद्भुतम् | अद्भुत (१.१) |
| इवाभवत् | इव (अव्ययः)–अभवत् (√भू लङ् प्र.पु. एक.) |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| न | नृ | तु | श्चा | प्स | रः | सं | घा |
| ग | न्ध | र्वा | श्च | ज | गुः | क | लम् |
| वि | वा | हे | र | घु | मु | ख्या | नां |
| त | द | द्भु | त | मि | वा | भ | वत् |