पदच्छेदः
| अथोपकार्यां | अथ (अव्ययः)–उपकारी (७.१) |
| जग्मुस् | जग्मुः (√गम् लिट् प्र.पु. बहु.) |
| ते | तद् (१.३) |
| सदारा | स (अव्ययः)–दार (१.३) |
| रघुनन्दनाः | रघुनन्दन (१.३) |
| राजाप्य् | राजन् (१.१)–अपि (अव्ययः) |
| अनुययौ | अनुययौ (√अनु-या लिट् प्र.पु. एक.) |
| पश्यन् | पश्यत् (√दृश् + शतृ, १.१) |
| सर्षिसंघः | स (अव्ययः)–ऋषि–संघ (१.१) |
| सबान्धवः | स (अव्ययः)–बान्धव (१.१) |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| अ | थो | प | का | र्यां | ज | ग्मु | स्ते |
| स | दा | रा | र | घु | न | न्द | नः |
| रा | जा | प्य | नु | य | यौ | प | श्य |
| न्स | र्षि | सं | घः | स | बा | न्ध | वः |