अन्वयः
रघुनन्दन O Joy of Raghus, राजेन्द्र O Indra among kings, महीपति: king of Kekaya, मम my, स्वस्रीयम् son of my sister, द्रष्टुकाम: wishing to see, तदर्थम् on that account, अहम् I, अयोध्याम् towards Ayodhya, उपयात: have gone.
Summary
The king of Kekaya, O Indra among kings, O Joy of the Raghus, desires to see my sisters's son and on that account I went to Ayodhya.
पदच्छेदः
| स्वस्रीयं | स्वस्रीय (२.१) |
| मम | मद् (६.१) |
| राजेन्द्र | राजन्–इन्द्र (८.१) |
| द्रष्टुकामो | द्रष्टु–काम (१.१) |
| महीपते | महीपति (८.१) |
| तदर्थम् | तद्–अर्थ (२.१) |
| उपयातो | उपयात (√उप-या + क्त, १.१) |
| ऽहम् | मद् (१.१) |
| अयोध्यां | अयोध्या (२.१) |
| रघुनन्दन | रघुनन्दन (८.१) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| स्व | स्री | यं | म | म | रा | जे | न्द्र |
| द्र | ष्टु | का | मो | म | ही | प | ते |
| त | द | र्थ | मु | प | या | तो | ऽह |
| म | यो | ध्यां | र | घु | न | न्द | न |