कच्चित्पितृवधामर्षी क्षत्रं नोत्सादयिष्यति ।
पूर्वं क्षत्रवधं कृत्वा गतमन्युर्गतज्वरः ।
क्षत्रस्योत्सादनं भूयो न खल्वस्य चिकीर्षितम् ॥
कच्चित्पितृवधामर्षी क्षत्रं नोत्सादयिष्यति ।
पूर्वं क्षत्रवधं कृत्वा गतमन्युर्गतज्वरः ।
क्षत्रस्योत्सादनं भूयो न खल्वस्य चिकीर्षितम् ॥
अन्वयः
पितृवधामर्षी enraged at the slaughter of his father, क्षत्रम् kshatriya race, नोत्सादयिष्यतिकच्चित् is he not intent upon exterminating, पूर्वम् formerly, क्षत्रवधम् slaughter of kshatriyas, कृत्वा having made, गतमन्यु: freed from anger, गतज्वर: freed from grief, भूय: again, क्षत्रस्य of kshatriya race, उत्सादनम् annihilation, अस्य for him, न चिकीर्षितं खलु is not desirous of doing it indeed.Summary
Enraged at the slaughter of his father (by Kartaveeryarjuna), is he intent upon exterminating the kshatriya race? Having slaughtered the kshatriyas, in the past he was freed from anger and grief. Is he again desirous of annihilating the kshatriyas?पदच्छेदः
| कच्चित् | कश्चित् (२.१) |
| पितृवधामर्षी | पितृ–वध–अमर्षिन् (१.१) |
| क्षत्रं | क्षत्र (२.१) |
| नोत्सादयिष्यति | न (अव्ययः)–उत्सादयिष्यति (√उत्-सादय् लृट् प्र.पु. एक.) |
| पूर्वं | पूर्वम् (अव्ययः) |
| क्षत्रवधं | क्षत्र–वध (२.१) |
| कृत्वा | कृत्वा (√कृ + क्त्वा) |
| गतमन्युर् | गत (√गम् + क्त)–मन्यु (१.१) |
| गतज्वरः | गत (√गम् + क्त)–ज्वर (१.१) |
| क्षत्रस्योत्सादनं | क्षत्र (६.१)–उत्सादन (१.१) |
| भूयो | भूयस् (अव्ययः) |
| न | न (अव्ययः) |
| खल्व् | खलु (अव्ययः) |
| अस्य | इदम् (६.१) |
| चिकीर्षितम् | चिकीर्षित (१.१) |
छन्दः
उपजातिः [११]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| क | च्चि | त्पि | तृ | व | धा | म | र्षी | क्ष | त्रं | नो | त्सा |
| द | यि | ष्य | ति | पू | र्वं | क्ष | त्र | व | धं | कृ | त्वा |
| ग | त | म | न्यु | र्ग | त | ज्व | रः | क्ष | त्र | स्यो | त्सा |
| द | नं | भू | यो | न | ख | ल्व | स्य | चि | की | र्षि | तम् |