पदच्छेदः
| ऋषीन् | ऋषि (२.३) |
| सर्वान् | सर्व (२.३) |
| पुरस्कृत्य | पुरस्कृत्य (√पुरस्-कृ + ल्यप्) |
| जगाम | जगाम (√गम् लिट् प्र.पु. एक.) |
| सबलानुगः | स (अव्ययः)–बल–अनुग (१.१) |
| गच्छन्तं | गच्छत् (√गम् + शतृ, २.१) |
| तु | तु (अव्ययः) |
| नरव्याघ्रं | नर–व्याघ्र (२.१) |
| सर्षिसंघं | स (अव्ययः)–ऋषि–संघ (२.१) |
| सराघवम् | स (अव्ययः)–राघव (२.१) |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| ऋ | षी | न्स | र्वा | न्पु | र | स्कृ | त्य |
| ज | गा | म | स | ब | ला | नु | गः |
| ग | च्छ | न्तं | तु | न | र | व्या | घ्रं |
| स | र्षि | सं | घं | स | रा | घ | वम् |