पदच्छेदः
| घोराः | घोर (१.३) |
| स्म | स्म (अव्ययः) |
| पक्षिणो | पक्षिन् (१.३) |
| वाचो | वाच् (२.३) |
| व्याहरन्ति | व्याहरन्ति (√व्या-हृ लट् प्र.पु. बहु.) |
| ततस् | ततस् (अव्ययः) |
| ततः | ततस् (अव्ययः) |
| भौमाश् | भौम (१.३) |
| चैव | च (अव्ययः)–एव (अव्ययः) |
| मृगाः | मृग (१.३) |
| सर्वे | सर्व (१.३) |
| गच्छन्ति | गच्छन्ति (√गम् लट् प्र.पु. बहु.) |
| स्म | स्म (अव्ययः) |
| प्रदक्षिणम् | प्रदक्षिण (२.१) |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| घो | राः | स्म | प | क्षि | णो | वा | चो |
| व्या | ह | र | न्ति | त | त | स्त | तः |
| भौ | मा | श्चै | व | मृ | गाः | स | र्वे |
| ग | च्छ | न्ति | स्म | प्र | द | क्षि | णम् |