अन्वयः
दशरथे when Dasaratha, एवम् in this way, ब्रुवति while saying, प्रतापवान् valiant, जामदग्न्य: son of Jamadagni, तद्वाक्यम् those words, अनादृत्यैव disregarding, राममेव Rama only, अभ्यभाषत addressed.
Summary
Disregarding these words of Dasaratha, the valiant son of Jamadagni said to Rama.
पदच्छेदः
| ब्रुवत्य् | ब्रुवत् (√ब्रू + शतृ, ७.१) |
| एवं | एवम् (अव्ययः) |
| दशरथे | दशरथ (७.१) |
| जामदग्न्यः | जामदग्न्य (१.१) |
| प्रतापवान् | प्रतापवत् (१.१) |
| अनादृत्यैव | अनादृत्य (अव्ययः)–एव (अव्ययः) |
| तद् | तद् (२.१) |
| वाक्यं | वाक्य (२.१) |
| रामम् | राम (२.१) |
| एवाभ्यभाषत | एव (अव्ययः)–अभ्यभाषत (√अभि-भाष् लङ् प्र.पु. एक.) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| ब्रु | व | त्ये | वं | द | श | र | थे |
| जा | म | द | ग्न्यः | प्र | ता | प | वान् |
| अ | ना | दृ | त्यै | व | त | द्वा | क्यं |
| रा | म | मे | वा | भ्य | भा | ष | त |