अन्वयः
तदा then, सर्षिसंघै: hosts of sages, सचारणै: with charanas, देवै: devatas, तत्र there, समागम्य having assembled, याचितौ beseeched, तौ those two, सुरोत्तमौ foremost of devatas, प्रशमम् peace, जग्मतु: obtained.
Summary
Then hosts of sages, charanas and the gods assembled there and beseeched both of them, the preeminent among the gods to keep peace.
पदच्छेदः
| देवैस् | देव (३.३) |
| तदा | तदा (अव्ययः) |
| समागम्य | समागम्य (√समा-गम् + ल्यप्) |
| सर्षिसंघैः | स (अव्ययः)–ऋषि–संघ (३.३) |
| सचारणैः | स (अव्ययः)–चारण (३.३) |
| याचितौ | याचित (√याच् + क्त, १.२) |
| प्रशमं | प्रशम (२.१) |
| तत्र | तत्र (अव्ययः) |
| जग्मतुस् | जग्मतुः (√गम् लिट् प्र.पु. द्वि.) |
| तौ | तद् (१.२) |
| सुरोत्तमौ | सुर–उत्तम (१.२) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| दे | वै | स्त | दा | स | मा | ग | म्य |
| स | र्षि | सं | घैः | स | चा | र | णैः |
| या | चि | तौ | प्र | श | मं | त | त्र |
| ज | ग्म | तु | स्तौ | सु | रो | त्त | मौ |