अन्वयः
विष्णुपराक्रमै: with the prowess of Visnu, जृम्भितम् made inert, तत् that, शैवम् relating to Siva, धनु: bow, दृष्ट्वा haivng seen, तदा then, सर्षिगणा: hosts of sages, देवा: devatas, विष्णुम् Visnu, अधिकम् as superior, मेनिरे thought over.
Summary
Now that the bow of Siva was made inert by Visnu's prowess, hosts of sages and gods acknowlged Visnu as superior.
पदच्छेदः
| जृम्भितं | जृम्भित (√जृम्भ् + क्त, २.१) |
| तद् | तद् (२.१) |
| धनुर् | धनुस् (२.१) |
| दृष्ट्वा | दृष्ट्वा (√दृश् + क्त्वा) |
| शैवं | शैव (२.१) |
| विष्णुपराक्रमैः | विष्णु–पराक्रम (३.३) |
| अधिकं | अधिक (२.१) |
| मेनिरे | मेनिरे (√मन् लिट् प्र.पु. बहु.) |
| विष्णुं | विष्णु (२.१) |
| देवाः | देव (१.३) |
| सर्षिगणास् | स (अव्ययः)–ऋषि–गण (१.३) |
| तदा | तदा (अव्ययः) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| जृ | म्भि | तं | त | द्ध | नु | र्दृ | ष्ट्वा |
| शै | वं | वि | ष्णु | प | रा | क्र | मैः |
| अ | धि | कं | मे | नि | रे | वि | ष्णुं |
| दे | वाः | स | र्षि | ग | णा | स्त | दा |