अन्वयः
महातेजा: exceedingly lustrous, ऋचीकस्तु Ruchika, पुत्रस्य to his son, अप्रतिकर्मण: of unrivalled valour, महात्मन: of the maganimous one, मम my, पितु: father, जमदग्ने: to Jamadagni, ददौ gave.
Summary
Brilliant Ruchika gave this bow to his son, the great Jamadagni, my father, a man of unrivalled valour.
पदच्छेदः
| ऋचीकस् | ऋचीक (१.१) |
| तु | तु (अव्ययः) |
| महातेजाः | महत्–तेजस् (१.१) |
| पुत्रस्याप्रतिकर्मणः | पुत्र (६.१)–अप्रतिकर्मन् (६.१) |
| पितुर् | पितृ (६.१) |
| मम | मद् (६.१) |
| ददौ | ददौ (√दा लिट् प्र.पु. एक.) |
| दिव्यं | दिव्य (२.१) |
| जमदग्नेर् | जमदग्नि (६.१) |
| महात्मनः | महात्मन् (६.१) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| ऋ | ची | क | स्तु | म | हा | ते | जाः |
| पु | त्र | स्या | प्र | ति | क | र्म | णः |
| पि | तु | र्म | म | द | दौ | दि | व्यं |
| ज | म | द | ग्ने | र्म | हा | त्म | नः |