अन्वयः
तपोबलसमन्विते endowed with ascetic energy, मे my, पितरि when my father, न्यस्तशस्त्रे renounced the weapons, अर्जुन: Karta Virya Arjuna, प्राकृताम् in a vulgar manner, मृत्युम् death, बुद्धिम् mind, आस्थितः resorting to, विदधे made.
Summary
My father equipped with ascetic energy renounced the weapon and was killed by Kartaveeryarjuna in a vulgar manner.
पदच्छेदः
| न्यस्तशस्त्रे | न्यस्त (√नि-अस् + क्त)–शस्त्र (७.१) |
| पितरि | पितृ (७.१) |
| मे | मद् (६.१) |
| तपोबलसमन्विते | तपस्–बल–समन्वित (७.१) |
| अर्जुनो | अर्जुन (१.१) |
| विदधे | विदधे (√वि-धा लिट् प्र.पु. एक.) |
| मृत्युं | मृत्यु (२.१) |
| प्राकृतां | प्राकृत (२.१) |
| बुद्धिम् | बुद्धि (२.१) |
| आस्थितः | आस्थित (√आ-स्था + क्त, १.१) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| न्य | स्त | श | स्त्रे | पि | त | रि | मे |
| त | पो | ब | ल | स | म | न्वि | ते |
| अ | र्जु | नो | वि | द | धे | मृ | त्युं |
| प्रा | कृ | तां | बु | द्धि | मा | स्थि | तः |