अन्वयः
तेजोभि: हतवीर्यत्वात् having been subdued of his energy by the prowess of Rama, जडीकृत: having been made motionless, जामदग्न्य: son of Jamadagni, कमलपत्राक्षम् him whose eyes resembling lotus petals, रामम् Rama, मन्दं मन्दम् slowly, slowly, उवाच ह spoke.
Summary
His energy subdued by Rama's prowess, the paralysed, Parasurama, son of Jamadagni spoke in gentle words to him whose eyes resembled the lotus petals:
पदच्छेदः
| तेजोभिर् | तेजस् (३.३) |
| हतवीर्यत्वाज् | हत (√हन् + क्त)–वीर्य–त्व (५.१) |
| जामदग्न्यो | जामदग्न्य (१.१) |
| जडीकृतः | जडीकृत (१.१) |
| रामं | राम (२.१) |
| कमलपत्त्राक्षं | कमल–पत्त्र–अक्ष (२.१) |
| मन्दं | मन्द (२.१) |
| मन्दम् | मन्द (२.१) |
| उवाच | उवाच (√वच् लिट् प्र.पु. एक.) |
| ह | ह (अव्ययः) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| ते | जो | भि | र्ह | त | वी | र्य | त्वा |
| ज्जा | म | द | ग्न्यो | ज | डी | कृ | तः |
| रा | मं | क | म | ल | प | त्रा | क्षं |
| म | न्दं | म | न्द | मु | वा | च | ह |