अन्वयः
रामे when Rama, गते had departed, प्रशान्तात्मा with serene mind, दाशरथि: son of Dasaratha, राम: Rama, ससायकम् together with arrow, धनु: bow, अप्रमेयाय immeasurable, strength, वरुणाय to Varuna, हस्ते in his hand, ददौ gave.
Summary
When Parasurama departed, Rama, son of Dasaratha with a serene mind gave the bow along with the arrow to Varuna of immeasurable strength.
पदच्छेदः
| गते | गत (√गम् + क्त, ७.१) |
| रामे | राम (७.१) |
| प्रशान्तात्मा | प्रशान्त (√प्र-शम् + क्त)–आत्मन् (१.१) |
| रामो | राम (१.१) |
| दाशरथिर् | दाशरथि (१.१) |
| धनुः | धनुस् (२.१) |
| वरुणायाप्रमेयाय | वरुण (४.१)–अप्रमेय (४.१) |
| ददौ | ददौ (√दा लिट् प्र.पु. एक.) |
| हस्ते | हस्त (७.१) |
| ससायकम् | स (अव्ययः)–सायक (२.१) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| ग | ते | रा | मे | प्र | शा | न्ता | त्मा |
| रा | मो | दा | श | र | थि | र्ध | नुः |
| व | रु | णा | या | प्र | मे | या | य |
| द | दौ | ह | स्ते | स | सा | य | कम् |