अन्वयः
सीता Sita, पितृकृता by his father, दारा इति as wife, रामस्य Rama's, प्रिया became beloved, गुणात् because of virtues, रूपगुणाच्चापि by virtue of beauty as well, प्रीति: affection, भूय: again, अभ्यवर्धत developed.
Summary
Chosen by his father Sita became Rama's beloved wife with her virtue and beauty his affection for her grew further.
पदच्छेदः
| प्रिया | प्रिय (१.१) |
| तु | तु (अव्ययः) |
| सीता | सीता (१.१) |
| रामस्य | राम (६.१) |
| दाराः | दार (१.३) |
| पितृकृता | पितृ–कृत (√कृ + क्त, १.३) |
| इति | इति (अव्ययः) |
| गुणाद् | गुण (५.१) |
| रूपगुणाच् | रूप–गुण (५.१) |
| चापि | च (अव्ययः)–अपि (अव्ययः) |
| प्रीतिर् | प्रीति (१.१) |
| भूयो | भूयस् (अव्ययः) |
| व्यवर्धत | व्यवर्धत (√वि-वृध् लङ् प्र.पु. एक.) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| प्रि | या | तु | सी | ता | रा | म | स्य |
| दा | राः | पि | तृ | कृ | ता | इ | ति |
| गु | णा | द्रू | प | गु | णा | च्चा | पि |
| प्री | ति | र्भू | यो | व्य | व | र्ध | त |