अन्वयः
वने in the forest, नित्यसंवृद्ध: grown up, सदा always, वनचर: a person moving in the forest, विप्रेन्द्र: foremost among brahmins, स: मुनि: that sage, नित्यम् always, पित्रनुवर्तनात् by following his father, अन्यम् others, न जानाति will not know.
Summary
Grown up in the forest and always moving with his father, that sage knows none other than his father.
पदच्छेदः
| स | तद् (१.१) |
| वने | वन (७.१) |
| नित्यसंवृद्धो | नित्य–संवृद्ध (√सम्-वृध् + क्त, १.१) |
| मुनिर् | मुनि (१.१) |
| वनचरः | वन–चर (१.१) |
| सदा | सदा (अव्ययः) |
| नान्यं | न (अव्ययः)–अन्य (२.१) |
| जानाति | जानाति (√ज्ञा लट् प्र.पु. एक.) |
| विप्रेन्द्रो | विप्र–इन्द्र (१.१) |
| नित्यं | नित्यम् (अव्ययः) |
| पित्रनुवर्तनात् | पितृ–अनुवर्तन (५.१) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| स | व | ने | नि | त्य | सं | वृ | द्धो |
| मु | नि | र्व | न | च | रः | स | दा |
| ना | न्यं | जा | ना | ति | वि | प्रे | न्द्रो |
| नि | त्यं | पि | त्र | नु | व | र्त | नात् |