पदच्छेदः
| आरोहे | आरोह (७.१) |
| विनये | विनय (७.१) |
| चैव | च (अव्ययः)–एव (अव्ययः) |
| युक्तो | युक्त (√युज् + क्त, १.१) |
| वारणवाजिनाम् | वारण–वाजिन् (६.३) |
| धनुर्वेदविदां | धनुर्वेद–विद् (६.३) |
| श्रेष्ठो | श्रेष्ठ (१.१) |
| लोके | लोक (७.१) |
| ऽतिरथसंमतः | अतिरथ–संमत (√सम्-मन् + क्त, १.१) |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| आ | रो | हे | वि | न | ये | चै | व |
| यु | क्तो | वा | र | ण | वा | जि | नाम् |
| ध | नु | र्वे | द | वि | दां | श्रे | ष्ठो |
| लो | के | ऽति | र | थ | सं | म | तः |