अन्वयः
परन्तपः subduer of enemies, दशरथः राजा king Dasaratha, अनुपमैः with incomparable, बहुभिः innumerable, एतैः these, गुणैः qualities, युक्तम् endowed with, सुतम् his son, दृष्ट्वा having seen, चिन्ताम् चक्रे contemplated.
Summary
Observing his son endowed with such innumerable and incomparable virtues, king Dasaratha, subduer of enemies started thinking.
पदच्छेदः
| एतैस् | एतद् (३.३) |
| तु | तु (अव्ययः) |
| बहुभिर् | बहु (३.३) |
| युक्तं | युक्त (√युज् + क्त, २.१) |
| गुणैर् | गुण (३.३) |
| अनुपमैः | अनुपम (३.३) |
| सुतम् | सुत (२.१) |
| दृष्ट्वा | दृष्ट्वा (√दृश् + क्त्वा) |
| दशरथो | दशरथ (१.१) |
| राजा | राजन् (१.१) |
| चक्रे | चक्रे (√कृ लिट् प्र.पु. एक.) |
| चिन्तां | चिन्ता (२.१) |
| परंतपः | परंतप (१.१) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| ए | तै | स्तु | ब | हु | भि | र्यु | क्तं |
| गु | णै | र | नु | प | मैः | सु | तम् |
| दृ | ष्ट्वा | द | श | र | थो | रा | जा |
| च | क्रे | चि | न्तां | प | रं | त | पः |