अन्वयः
महातेजा: brilliant, राजापि the king also, महेन्द्रवरुणोपमौ equal to great Indra and Varuna, प्रोषितौ who were away from home, सुतौ sons, भरतशत्रुघ्नौ उभौ both Bharata and Satrughna, सस्मार remembered.
Summary
The glorious king Dasaratha also remembered his sons, Bharata and Satrughna, who were like the great Indra and Varuna, (now) away from home.
पदच्छेदः
| राजापि | राजन् (१.१)–अपि (अव्ययः) |
| तौ | तद् (२.२) |
| महातेजाः | महत्–तेजस् (१.१) |
| सस्मार | सस्मार (√स्मृ लिट् प्र.पु. एक.) |
| प्रोषितौ | प्रोषित (√प्र-वस् + क्त, २.२) |
| सुतौ | सुत (२.२) |
| उभौ | उभ् (२.२) |
| भरतशत्रुघ्नौ | भरत–शत्रुघ्न (२.२) |
| महेन्द्रवरुणोपमौ | महत्–इन्द्र–वरुण–उपम (२.२) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| रा | जा | पि | तौ | म | हा | ते | जाः |
| स | स्मा | र | प्रो | षि | तौ | सु | तौ |
| उ | भौ | भ | र | त | श | त्रु | घ्नौ |
| म | हे | न्द्र | व | रु | णो | प | मौ |