अन्वयः
राघवः Rama, यदा when ते in relation to you, जननीतुल्याम् like his own mother, वृत्तिम् conduct, वहति was carrying out, तस्यैव to such a person, अनर्थाय for injustice, त्वम् you, किं निमित्तम् for what purpose, इह here, उद्यता are you attempting?
Summary
Then Rama was conducting himself in relation to you as his own mother, for what purpose are you seeking injustice to such a person?
पदच्छेदः
| सदा | सदा (अव्ययः) |
| ते | त्वद् (४.१) |
| जननीतुल्यां | जननी–तुल्य (२.१) |
| वृत्तिं | वृत्ति (२.१) |
| वहति | वहति (√वह् लट् प्र.पु. एक.) |
| राघवः | राघव (१.१) |
| तस्यैव | तद् (६.१)–एव (अव्ययः) |
| त्वम् | त्वद् (१.१) |
| अनर्थाय | अनर्थ (४.१) |
| किंनिमित्तम् | किंनिमित्त (२.१) |
| इहोद्यता | इह (अव्ययः)–उद्यत (√उत्-यम् + क्त, १.१) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| स | दा | ते | ज | न | नी | तु | ल्यां |
| वृ | त्तिं | व | ह | ति | रा | घ | वः |
| त | स्यै | व | त्व | म | न | र्था | य |
| किं | नि | मि | त्त | मि | हो | द्य | ता |