अन्वयः
यदा when, सर्वः all, जीवलोकः living beings of the world, रामस्य Rama's, गुणस्तवम् extoling virtues, आह is telling, (then), कम् what, अपराधम् crime, उद्धिश्य showing, अहम् I, इष्टं सुतम् beloved son, त्यक्ष्यामि I shall abandon.
Summary
When all living beings of this world are extoling the virtues of Rama, for what crime should I abandon my beloved son?
पदच्छेदः
| जीवलोको | जीव–लोक (१.१) |
| यदा | यदा (अव्ययः) |
| सर्वो | सर्व (१.१) |
| रामस्येह | राम (६.१)–इह (अव्ययः) |
| गुणस्तवम् | गुण–स्तव (२.१) |
| अपराधं | अपराध (२.१) |
| कम् | क (२.१) |
| उद्दिश्य | उद्दिश्य (√उत्-दिश् + ल्यप्) |
| त्यक्ष्यामीष्टम् | त्यक्ष्यामि (√त्यज् लृट् उ.पु. )–इष्ट (√इष् + क्त, २.१) |
| अहं | मद् (१.१) |
| सुतम् | सुत (२.१) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| जी | व | लो | को | य | दा | स | र्वो |
| रा | म | स्ये | ह | गु | ण | स्त | वम् |
| अ | प | रा | धं | क | मु | द्दि | श्य |
| त्य | क्ष्या | मी | ष्ट | म | हं | सु | तम् |