अन्वयः
सत्यात्मनाम् among truthful men, वरः best, रामः Rama, जाबालेः Jabali's, वचः words, श्रुत्वा hearing, परया supreme, भक्त्या with devotion, अविपन्नया unshaken, स्वबुद्ध्या च by his own judgment, उवाच said.
Summary
Having heard the words of the magnanimous Lakshmana, Kausalya, depressed and weeping, said to Rama:
पदच्छेदः
| जाबालेस् | जाबालि (६.१) |
| तु | तु (अव्ययः) |
| वचः | वचस् (२.१) |
| श्रुत्वा | श्रुत्वा (√श्रु + क्त्वा) |
| रामः | राम (१.१) |
| सत्यात्मनां | सत्य–आत्मन् (६.३) |
| वरः | वर (१.१) |
| उवाच | उवाच (√वच् लिट् प्र.पु. एक.) |
| परया | पर (३.१) |
| युक्त्या | युक्ति (३.१) |
| स्वबुद्ध्या | स्व–बुद्धि (३.१) |
| चाविपन्नया | च (अव्ययः)–अविपन्न (३.१) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| जा | बा | ले | स्तु | व | चः | श्रु | त्वा |
| रा | मः | स | त्या | त्म | नां | व | रः |
| उ | वा | च | प | र | या | यु | क्त्या |
| स्व | बु | द्ध्या | चा | वि | प | न्न | या |