अन्वयः
ऋषयश्चैव sages, देवाश्च the gods or, सत्यमेव the truth only, मेनिरे considered (supreme virtue), सत्यवादी truthful, अस्मिन् लोके in this world, परमम् highest, क्षयम् state, गच्छति attains, हि indeed.
Summary
Sages and gods all accept truth (as the supreme virtue). A truthful man of this world, attains the highest state (abode).
पदच्छेदः
| ऋषयश् | ऋषि (१.३) |
| चैव | च (अव्ययः)–एव (अव्ययः) |
| देवाश् | देव (१.३) |
| च | च (अव्ययः) |
| सत्यम् | सत्य (२.१) |
| एव | एव (अव्ययः) |
| हि | हि (अव्ययः) |
| मेनिरे | मेनिरे (√मन् लिट् प्र.पु. बहु.) |
| सत्यवादी | सत्य–वादिन् (१.१) |
| हि | हि (अव्ययः) |
| लोके | लोक (७.१) |
| ऽस्मिन् | इदम् (७.१) |
| परमं | परम (२.१) |
| गच्छति | गच्छति (√गम् लट् प्र.पु. एक.) |
| क्षयम् | क्षय (२.१) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| ऋ | ष | य | श्चै | व | दे | वा | श्च |
| स | त्य | मे | व | हि | मे | नि | रे |
| स | त्य | वा | दी | हि | लो | के | ऽस्मि |
| न्प | र | मं | ग | च्छ | ति | क्ष | यम् |