अन्वयः
असत्यसन्धस्य सतः one who is inclined to untruth, चलस्य of a fickle man, अस्थिरचेतसः of an unsteady mind, देवाः gods, न प्रतीच्छन्ति will not accept, पितरः ancestors, इति thus, नः for us, श्रुतम् heard.
Summary
We have heard that the offerings of a man inclined to untruth, of an unstable and unsteady mind are accepted neither by the gods nor by the ancestors.
पदच्छेदः
| असत्यसंधस्य | असत्य–संधा (६.१) |
| सतश् | सत् (६.१) |
| चलस्यास्थिरचेतसः | चल (६.१)–अस्थिर–चेतस् (६.१) |
| नैव | न (अव्ययः)–एव (अव्ययः) |
| देवा | देव (१.३) |
| न | न (अव्ययः) |
| पितरः | पितृ (१.३) |
| प्रतीच्छन्तीति | प्रतीच्छन्ति (√प्रति-इष् लट् प्र.पु. बहु.)–इति (अव्ययः) |
| नः | मद् (६.३) |
| श्रुतम् | श्रुत (√श्रु + क्त, १.१) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| अ | स | त्य | सं | ध | स्य | स | त |
| श्च | ल | स्या | स्थि | र | चे | त | सः |
| नै | व | दे | वा | न | पि | त | रः |
| प्र | ती | च्छ | न्ती | ति | नः | श्रु | तम् |