अन्वयः
मया by me, गुरुसन्निधौ in the presence of my father, स्थिरा firm, प्रतिज्ञा vow, प्रतिज्ञाता is sworn, तदा then, सा that, देवी कैकेयी च Devi Kaikeyi, प्रहृष्यमाणा अभवत् became immensely delighted.
Summary
I had taken a firm vow in the presence of my father (about my stay in the forest). And then Devi Kaikeyi was immensely delighted.
पदच्छेदः
| स्थिरा | स्थिर (१.१) |
| मया | मद् (३.१) |
| प्रतिज्ञाता | प्रतिज्ञात (√प्रति-ज्ञा + क्त, १.१) |
| प्रतिज्ञा | प्रतिज्ञा (१.१) |
| गुरुसंनिधौ | गुरु–संनिधि (७.१) |
| प्रहृष्टमानसा | प्रहृष्ट (√प्र-हृष् + क्त)–मानस (१.१) |
| देवी | देवी (१.१) |
| कैकेयी | कैकेयी (१.१) |
| चाभवत् | च (अव्ययः)–अभवत् (√भू लङ् प्र.पु. एक.) |
| तदा | तदा (अव्ययः) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| स्थि | रा | म | या | प्र | ति | ज्ञा | ता |
| प्र | ति | ज्ञा | गु | रु | सं | नि | धौ |
| प्र | हृ | ष्ट | मा | न | सा | दे | वी |
| कै | के | यी | चा | भ | व | त्त | दा |