अन्वयः
अहम् I, हीनप्रतिज्ञया by breaking the vow, अनया with this, वृत्त्या practice, वर्तमानः presently, कस्य to whom, वृत्तम् virtuous conduct, दास्यामि can I give, केन वा to whom, स्वर्गम् heaven, आप्नुयाम् can I attain.
Summary
How can I advise others for a virtuous conduct or how can I attain heaven if I break the vow which I follow at present.
पदच्छेदः
| कस्य | क (६.१) |
| यास्याम्य् | यास्यामि (√या लृट् उ.पु. ) |
| अहं | मद् (१.१) |
| वृत्तं | वृत्त (२.१) |
| केन | क (३.१) |
| वा | वा (अव्ययः) |
| स्वर्गम् | स्वर्ग (२.१) |
| आप्नुयाम् | आप्नुयाम् (√आप् विधिलिङ् उ.पु. ) |
| अनया | इदम् (३.१) |
| वर्तमानो | वर्तमान (√वृत् + शानच्, १.१) |
| ऽहं | मद् (१.१) |
| वृत्त्या | वृत्ति (३.१) |
| हीनप्रतिज्ञया | हीन (√हा + क्त)–प्रतिज्ञा (३.१) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| क | स्य | या | स्या | म्य | हं | वृ | त्तं |
| के | न | वा | स्व | र्ग | मा | प्नु | याम् |
| अ | न | या | व | र्त | मा | नो | ऽहं |
| वृ | त्त्या | ही | न | प्र | ति | ज्ञ | या |